साल 2022 राष्ट्रीय राजनीति के संदर्भ में कितना महत्वपूर्ण है?

राजनीति । वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के पहले यह साल राष्ट्रीय राजनीति के लिए बहुत निर्णायक है। इस साल न केवल सात विधानसभाओं के चुनाव होने हैं, बल्कि 74 राज्यसभा सदस्यों समेत देश के अगले राष्ट्रपति का भी चुनाव होगा। इन विभिन्न चुनावों में जिस भी राष्ट्रीय पार्टी या गठबंधन को बहुमत मिलेगा, अगले लोकसभा चुनाव के लिए उसे नैतिक बल और मनोवैज्ञानिक लाभ मिलने के अलावा केंद्र में सरकार बनाने के लिए अनुकूल सियासी समीकरण गढ़ने का अवसर भी उसे मिलेगा।यही कारण है कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों के कई महीने पहले से ही केंद्रीय गृहमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के अजेय रणनीतिकार माने जाने वाले अमित शाह ने डेरा जमा लिया है, जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी पिछले लगभग डेढ़ महीने से बार बार उत्तर प्रदेश का दौरा और वहां कार्यक्रम कर रहे हैं। इन कार्यक्रमों में तमाम नए निर्माण कार्यो का उद्घाटन और लोकार्पण के साथ प्रधानमंत्री नवीन घोषणाएं भी कर रहे हैं।

फरवरी-मार्च में इन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं- उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा। इन पांचों राज्यों में कुल मिलाकर विधानसभा की 690 और लोकसभा की 132 सीटें हैं। लोकसभा की 543 सदस्य संख्या में ये 132 सीटें उसकी कुल संख्या की 24 प्रतिशत बनती हैं, जबकि इन प्रदेशों की ये 690 विधानसभा सीटें देश के कुल 4,120 विधानसभा सदस्यों का 16 प्रतिशत हैं। भारतीय जनता पार्टी यदि इन पांचों प्रदेशों में सरकार नहीं बना पाती है तो उसके लिए साल 2024 के लोकसभा चुनाव की राह आसान नहीं रहेगी। साथ ही हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि नए राष्ट्रपति के चुनाव में भी इन आंकड़ों की भूमिका बहुत निर्णायक रहेगी। उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष जुलाई में जो 4,120 विधानसभा सदस्य और 776 सांसदों का निर्वाचक मंडल राष्ट्रपति चुनेगा, उसमें 690 विधायक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे।

लोकसभा चुनाव की तरह ही राष्ट्रपति के चुनाव में भी उत्तर प्रदेश की भूमिका निर्णायक होती है। राष्ट्रपति चुनाव में उत्तर प्रदेश के 83,824 वोट होते हैं। फरवरी-मार्च में जिन पांच विधानसभाओं के चुनाव होने हैं, राष्ट्रपति चुनाव के लिए उनके वोट का कुल मूल्य 1,03,756 वोट बनता है। इसलिए कम से कम राष्ट्रीय दलों या गठबंधनों के लिए इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है। फरवरी-मार्च में पांच विधानसभाओं के बाद नवंबर-दिसंबर में दो और राज्यों गुजरात तथा हिमाचल प्रदेश में भी विधानसभा चुनाव होने हैं, जबकि अप्रैल और जुलाई के बीच संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा की 73 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव होने हैं। यानी राज्यसभा की एक तिहाई सीटों पर नए सदस्य चुने जाने हैं।

राज्यसभा के जिन महत्वपूर्ण सदस्यों का कार्यकाल स साल अप्रैल से जुलाई के बीच पूरा होने जा रहा है उनमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पीयूष गोयल के अलावा कांग्रेस के महत्वपूर्ण सदस्य पी. चिदंबरम, शिव सेना के संजय राउत, भाजपा के एमजे अकबर और मुख्तार अब्बास नकवी जैसे दिग्गज नेता शामिल हैं। इनके अलावा आनंद शर्मा, एके एंटनी, सुब्रह्मणयम स्वामी, सुरेश प्रभु, कपिल सिब्बल और प्रफुल्ल पटेल जैसे दिग्गजों का भविष्य भी अप्रैल से जुलाई के बीच होने वाले राज्यसभा चुनावों में निर्भर होगा।इस बीच गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सक्रियता यह बता रही है कि साल 2022 राष्ट्रीय राजनीति के लिए कितना महत्वपूर्ण है? आगामी पांच और साल के अंत में दो विधानसभाओं के लिए होने वाले चुनावों में भारी जीत हासिल करके ही भारतीय जनता पार्टी अगले लोकसभा चुनावों के लिए पूरी ताकत से आगे बढ़ सकेगी।

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