जिस दिन कोर्ट गया, उसी दिन हमारे हक में आएगा फैसला,चिराग

नई दिल्‍ली । चाचा पारस और भतीजा चिराग के खेमों में शक्ति प्रदर्शन चल रहा है। चुनाव आयोग के दरवाजे खटखटाए जा रहे हैं। आंध्र प्रदेश के जगन मोहन रेड्डी की तर्ज पर चिराग पासवान अब बिहार में सद्भावना बटोरने यात्रा पर निकलने वाले हैं।रामविलास की लोजपा अब किसकी, इसे लेकर लड़ाई सड़क पर आ चुकी है। सांसद तो चले गए, लेकिन वह आश्वस्त हैं कि पार्टी उनकी ही रहेगी। दैनिक जागरण के आशुतोष झा से बातचीत के अंश…

क्या रामविलासजी ने कभी आपको पारसजी की महत्वाकांक्षा और व्यवहार को लेकर आगाह किया था?

उन्होंने अकेले में कभी मम्मी से कुछ साझा किया हो तो मुझे पता नहीं। वह तो हमेशा मुझे ही समझाते थे कि सभी को साथ लेकर चलना है। लेकिन उनमें कहीं-न-कहीं दूरदृष्टि थी, क्योंकि जब उन्होंने मुझे अध्यक्ष बनाने की बात कही थी तो मैं अड़ गया था कि अभी क्यों? इतनी जल्दबाजी क्यों? लेकिन वह भी अड़ गए। उन्होंने कहा था-मैं अपने रहते तुम्हें जिम्मेदारी देना चाहता हूं और एक साल के अंदर वह चल बसे। उनको गए अभी एक साल भी नहीं हुआ कि चाचा भी मुझे छोड़कर अलग हो गए।

लेकिन उन्हें प्रदेश अध्यक्ष के पद से तो आपने ही हटाया था?

हां यह सच है। लेकिन यह इसलिए क्योंकि वह कुछ कारणों से राज्य का दौरा भी नहीं कर रहे थे। 2005 से वह प्रदेश अध्यक्ष थे। लोकसभा चुनाव के वक्त उन्होंने लोजपा के राजग में जाने का विरोध किया था। उनका कहना था कि संप्रग जितनी भी दे उतनी लेकर संतुष्ट हो जाना चाहिए। 2015 में भी उनके नेतृत्व में चुनाव हुआ और नतीजा क्या था आप जानते हैं। यह पार्टी हित में लिया गया फैसला था।

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