रामलला भी अछूते नहीं हैं अयोध्या में रामलला को ठिठुरन से बचाने के लिए रजाई ओढ़ाई जा रही है

उत्तर प्रदेश ,राजनीति संदेश [अतुल पान्डेय]। अयोध्या में मौसम के इस बदले मिजाज से रामलला भी अछूते नहीं हैं। रामनगरी अयोध्या में रामलला को ठिठुरन से बचाने के लिए रजाई ओढ़ाई जा रही है और ब्लोअर से गर्माहट दी जा रही है। हालांकि इस बार श्रीराम जन्मभूमि में रामलला पर ठंड कोई ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि वह अब टेंट से निकलकर अस्थाई मंदिर में विराजमान हो चुके हैं।छह दिसंबर, 1992 को ढांचा ढहाये जाने के बाद से जहां रामलला 27 वर्ष तक अस्थायी मंदिर में विराजमान रहे हैं, वहीं उनकी सेवा-पूजा में समुचित संसाधन का अभाव भी महसूस किया जाता रहा।

पिछले वर्ष नौ नवंबर को सुप्रीम फैसला आने के बाद जहां भव्य मंदिर निर्माण की तैयारी शुरू हुई, वहीं मंदिर निर्माण होने तक रामलला को समुचित साज-सज्जा से युक्त वैकल्पिक गर्भगृह में स्थापित किये जाने का प्रयास हुआ। इसी वर्ष 25 मार्च को रामलला को वैकल्पिक गर्भगृह में स्थापित किये जाने का प्रयास फलीभूत हुआ और रामलला की सेवा-पूजा तथा भोग-राग की व्यवस्था भी अपेक्षानुरूप सुनिश्चित हुई। इसी कोशिश का परिणाम है कि ठंड की दस्तक के साथ रामलला की सेवा में समुचित संसाधन प्रस्तुत किया गया है।

अयोध्या में स्थित श्रीराम जन्मभूमि परिसर में विराजमान रामलला 28 वर्षों से टेंट में रहे। इस दौरान रामलला को सिर्फ गर्म वस्त्र ही मिल रहे थे। टेंट में सुरक्षा कारणों से किसी भी प्रकार के यंत्र और अंगीठी के प्रयोग पर रोक थी, लेकिन नौ नवंबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 25 मार्च को रामलला टेंट से निकलकर आधुनिक सुविधाओं से संपन्न अस्थाई मंदिर में विराजमान हैं। ठंड से बचाने के लिए लगाया गया ब्लोअर साथ ही ठंड को देखते हुए रामलला के लिए तीन जोड़ी रजाई गद्दा और गर्म कपड़े बनाए गए हैं।श्रीराम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि 27 वर्षों तक भगवान रामलला विवाद होने के कारण टेंट में विराजमान थे, जहां उन्हें सिर्फ एक रजाई दो प्रकार के वस्त्र ही मिल पा रहे थे। टेंट में होने के कारण किसी भी प्रकार का यंत्र और अंगूठी का प्रयोग नहीं किया जा सकता था, लेकिन अब रामलला पहली बार आधुनिक सुख सुविधा से युक्त मंदिर में विराजमान है। ठंड को लेकर गर्म हवा देने वाले ब्लोअर मशीन, गद्दा, रजाई और वस्त्र के साथ सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

 

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