वेटेरिनरी फार्मेसी,8 माह बीत चुके और 400 डिप्लोमा धारकों को पशुपालन विभाग पंजीकरण संख्या प्रदान नहीं कर पाया

उत्तर प्रदेश,लखनऊ राजनीति संदेश [रुद्रांश पान्डेय] Iपिछले वर्ष दिसम्बर माह में वेटेरिनरी फार्मेसी के पंजीकरण हेतु पशुपालन विभाग उ०प्र० ने विभागीय वेबसाइट एवं समाचार पत्रों के माध्यम से डिप्लोमाधरकों को पंजीकरण हेतु सूचित किया था।तब से लेकर अब तक 8 माह बीत चुके हैं, और 400 डिप्लोमाधारकों को पशुपालन विभाग पंजीकरण संख्या प्रदान नहीं कर पाया है।गौरतलब है, कि पशुपालन विभाग और उ० प्र० शासन के निर्देश पर पशुपालन विभाग में वेटेरिनरी फार्मासिस्ट की कमी को दूर करने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा डिप्लोमा इन वेटेरिनरी फार्मेसी का पाठ्यक्रम शुरू किया गया था ।

तब से लेकर अब तक लगभग 400 डिप्लोमाधारक उत्तीर्ण होकर निकल चुके हैं, लेकिन विभाग ने वेटरिनरी फार्मेसी के डिप्लोमाधारकों को न तो अब तक पंजीकरण प्रमाण पत्र दिया है और ना ही नियुक्ति के लिए सेवा नियमावली का प्रख्यापन विभाग कर रहा है।पशुपालन विभाग में वेटेरिनरी फार्मेसी के 2000 से अधिक पद स्वीकृत हैं जिसमें कि आधे से अधिक खाली हैं।किसी किसी जनपद में 1 वेटेरिनरी फार्मासिस्ट के पास 2 से 4 या 5 वेटरिनरी हॉस्पिटल तक का चार्ज है। ऐसे मे विभागीय अधिकारी सिर्फ कागजी खाना पूर्ति करके ही काम चला रहे हैं।

जब मुख्यमंत्री जी स्वयं खाली पदों को भरने के लिये इतनी इच्छा जता चुके हों तो पशुपालन विभाग में इतने पदों के खाली होने पर भी 15 वर्ष से लंबित सेवा नियमावली का प्रख्यापन न करने पर विभाग एवं शासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।

 

Posted By: RUDRANSH PANDEY  

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