डेढ साल की उम्र में युवराज का भविष्य हो गया था तय,

राजनीति संदेश [रुद्रांश पान्डेय] । भारतीय क्रिकेट टीम के महानतम ऑलराउंडर में शुमार पूर्व दिग्गज युवराज सिंह ने पूरी दुनिया में डंका बजाया। युवी ने टी20 विश्व कप में इंग्लैंड के स्टुअर्ट ब्रॉड के ओवर में लगातर छह छक्के लगाए। 2011 विश्व कप में भारत चैंपपियन बना और युवी को टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया।एक पिता जिसने अपनी जिद और जुनून से अपने बेटे को चैंपियन बनाया। वह पिता हैं पूर्व क्रिकेटर योगराज सिंह और चैंपियन बेटा है युवराज सिंह।

1981 में जब योगराज भारतीय टीम से बाहर हुए तो उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि वह पांच साल टीम में आने के लिए संघर्ष करेंगे और अगर कामयाब नहीं हुए तो अपने बेटे को विश्व का सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर बनाएंगे।तब सिक्सर किंग युवी सिर्फ डेढ़ साल के थे। योगराज बताते हैं कि अगले दिन अखबार में छपे इंटरव्यू को काटकर उन्होंने एक डायरी में रख लिया और बेटे के लिए प्लास्टिक का बैट और बॉल ले आए। वह कहते हैं, उस दिन के बाद से मैं सो नहीं सका और युवी को मैंने सोने नहीं दिया। जैसे-जैसे युवी की उम्र बढ़ती गई, वैसे-वैसे मेरा जुनून बढ़ता गया।

आठ साल का युवी बैट तब पकड़ता, जब स्टेडियम के 8-10 चक्कर लगाता। लोग तो लोग, मेरा परिवार भी मेरे खिलाफ हो गया।योगराज बताते हैं कि जब साल 2011 के विश्व कप के दौरान युवी को कैंसर हुआ, तो उन्होंने युवी से कहा था कि यह मौका दोबारा नहीं आएगा। मैदान ही तेरी रणभूमि है, अब तू इसे छोड़ नहीं सकता। इस जीत के बाद युवी ने मुझे एक बैट भेंट किया, जिस पर लिखा था, थैंक्स डैड फॉर टर्निग मी इन ग्रेटेस्ट वॉरियर एंड राइ¨टग एपिक जर्नी फॉर मी, थैंक्यू। यह शब्द मेरी वर्षो की तपस्या के लिए किसी वरदान से कम नहीं थे।

Posted By: RUDRANSH PANDEY

...